Poems

Upagupta (Hindi)

सावन की पुलकित यामिनीतुषार मलिन हुयी ज्योत्सनाजलयुक्त पवन के मध्य कहिँमेघ दिखा रहे रोद्र अपना मथुरा की प्राचीर पासधूल धरे धरा मे सुप्तबुद्ध का वो प्रिय शिष्यआदर्श प्रतिमा – उपगुप्त प्रविश्य बन्द, बुझ चुके दीपगहरी निद्रा मे लीन निवेशपायल पैरो के गीत सुनातेधारण किये वो अग्निवेश हारोँ के मोती दँभ भरेसाँसो मे जैसे तुफानआभुषणो मे

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