Ram

माँ

A hindi poem for mother सो सका सुख से, जिसमे मेरा मन,तेरी गोद जैसे, फूलो का आसन ! दुःख समेट लेता, तेरा ये आंचल आशीषों का भण्डार, और मेरा संबल ! आशीषों के इस झरने मे, डूब डूब ही जाऊ ध्रुव की अचल शिला सी, पदवी कोई पाउँ ! अनजाने मे कभी, ऐसा ना हो

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HM RTV Vehicle Inauguration day

मेरी पहली नौकरी

1998 की गर्मीयों की बात है। मैंने अभी-अभी इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय से अपना एमबीए पूरा किया था। हर नए ग्रेजुएट की तरह मुझे भी उम्मीद थी कि जल्द ही कोई अच्छी नौकरी मिल जाएगी।हफ्ते बीत गए, पर किसी भी कम्पनी से कोई खबर ही नहीं आई। उन दिनों इंटरनेट तो था नहीं, आप

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First job reporting

(यह हिंदी में पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें ) It was the summer of 1998. I had just completed my MBA in Indore, a city in central India, and like any fresh graduate, I was hopeful about landing a good job. But weeks passed, and nothing came through. I returned to my village feeling

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